"Indore News: स्कूल बसों के लिए लागू हुए 31 नए नियम, जानिए आपके लिए क्या है ज़रूरी!"
"Indore News: स्कूली बसों के संचालन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी – फिटनेस, बीमा और परमिट अनिवार्य; उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई"
इंदौर जिले में स्कूली बसों के संचालन को लेकर आरटीओ ने जारी किए दिशा-निर्देश
इंदौर जिले में संचालित सभी स्कूली बसों के संचालन के संबंध में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूलों और बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सभी स्कूलों को यह अनिवार्य रूप से सूचित करना होगा कि उनके संस्थान में कितनी स्कूली बसें उपयोग में हैं और कितनी अनुपयोगी हैं। इसके साथ ही प्रत्येक बस का फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, परमिट और अन्य आवश्यक दस्तावेज अद्यतन एवं वैध होने चाहिए।
यदि किसी बस में दस्तावेजों की कमी या खामी पाई जाती है, तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सभी स्कूली बसों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी उपाय सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है।
शहर के सभी शैक्षणिक संस्थानों के संचालकों और प्राचार्यों की बैठक सम्पन्न, परिवहन नियमों के पालन पर दिया गया जोर
रेसीडेंसी परिसर में शहर के समस्त शैक्षणिक संस्थानों के संचालकों एवं प्राचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) श्री प्रदीप शर्मा ने की। उन्होंने मोटरयान अधिनियम एवं नवीन परिवहन दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी और सभी संस्थानों से अपेक्षा की कि वे निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि कई स्कूल बसों की फिटनेस समाप्त हो चुकी है और उनका नवीनीकरण अब तक नहीं कराया गया है। ऐसे संस्थानों को निर्देशित किया गया कि वे शीघ्र ही इन बसों की फिटनेस प्रमाण-पत्र नवीनीकृत कराएं, अथवा यदि वाहन अनुपयोगी हैं तो उनकी जानकारी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
सभी शिक्षण संस्थानों से यह भी कहा गया कि वे अपने संस्थान की बसों से संबंधित समस्त वैध दस्तावेजों एवं परिसर में खड़े अनुपयोगी वाहनों की सूची आरटीओ को प्रस्तुत करें। इस हेतु एक निर्धारित प्रारूप (फॉर्मेट) भी बैठक में वितरित किया गया।
बैठक में एडीसीपी ट्रैफिक श्री संतोष कुमार कौल, एआरटीओ श्रीमती अर्चना मिश्रा एवं श्री राजेश गुप्ता भी उपस्थित थे।
शैक्षणिक संस्थानों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे अपने वाहनों में Vehicle Location Tracking Device (VLTD), स्पीड गवर्नर, फायर सेफ्टी इक्विपमेंट (FAPS), CCTV कैमरा आदि की अद्यतन जानकारी भी साझा करें। कुछ संस्थानों ने ATS/फिटनेस सेंटरों और अधिकृत VLTD एजेंसियों द्वारा कार्य समय पर न किए जाने और डिवाइस में आ रही तकनीकी समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्हें इस संबंध में लिखित में प्रतिवेदन शीघ्र आरटीओ कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उपस्थित गोल्डन इंटरनेशनल स्कूल, केट रोड तथा जे.जी. पब्लिक स्कूल, महू के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके द्वारा ब्रेथ एनालाइज़र मशीनें क्रय की गई हैं, जिनसे प्रतिदिन सुबह और दोपहर में ड्राइवरों की जांच की जाती है, जिससे शराब सेवन कर वाहन संचालन पर अंकुश लगाया जा सके। अन्य सभी स्कूलों को भी इस प्रकार की मशीनें क्रय कर नियमित जांच करने हेतु निर्देशित किया गया।
स्कूल बसों के सुरक्षित संचालन हेतु दिशा-निर्देश
शैक्षणिक संस्थानों से संबद्ध सभी स्कूल बसों की सुरक्षित एवं अनुशासित संचालन सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है:
-
उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन किया जाना आवश्यक है।
-
सभी स्कूल बसों का रंग पीला होना चाहिए।
-
बस के आगे और पीछे स्पष्ट रूप से “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। यदि बस किसी एजेंसी से अनुबंध पर ली गई है, तो उस पर “ऑन स्कूल ड्यूटी” अंकित हो।
-
प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स (First Aid Box) की उपलब्धता अनिवार्य है।
-
परिवहन विभाग से अनुमोदित स्पीड गवर्नर बस में अनिवार्य रूप से लगा होना चाहिए।
-
प्रत्येक बस में सुरक्षा के लिए हॉरिजॉन्टल ग्रिल होनी चाहिए।
-
फायर एक्सटिंग्विशर बस में उपस्थित और क्रियाशील स्थिति में होना चाहिए।
-
बस पर स्कूल का नाम एवं संपर्क नंबर अंकित होना चाहिए।
-
सीटों के नीचे स्कूली बैग रखने की सुविधा होनी चाहिए।
-
चालक के पास न्यूनतम 5 वर्षों का भारी वाहन चलाने का अनुभव अनिवार्य है।
-
बस में एक सुरक्षाकर्मी – शिक्षक, कंडक्टर, अभिभावक या माता-पिता में से कोई – अवश्य होना चाहिए। छात्राओं के लिए उपयोग की जा रही बसों में महिला परिचालक या चालक की उपस्थिति आवश्यक है।
-
चालक के विरुद्ध कोई लंबित चालान या प्रकरण नहीं होना चाहिए।
-
हर स्कूल बस में आपातकालीन निकास द्वार होना चाहिए।
-
GPS ट्रैकिंग डिवाइस एवं CCTV कैमरा लगे होना चाहिए और हमेशा चालू स्थिति में रहने चाहिए।
-
बस के अंदर परदे या फिल्म लगे शीशे प्रतिबंधित हैं, ताकि अंदर की गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से बाहर से दिख सकें।
-
बस के अंदर पर्याप्त रोशनी और स्वच्छता सुनिश्चित की जाए।
-
सीटें गैर-ज्वलनशील सामग्री से बनी होनी चाहिए, जिससे आग की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
-
बस पर रिफ्लेक्टिव टेप और स्टॉप साइन अवश्य लगे हों।
-
चालकों के पास वैध रजिस्ट्रेशन, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, पीयूसी एवं बीमा दस्तावेज उपलब्ध हों।
-
बस में स्टेपनी टायर और मरम्मत किट होना चाहिए।
-
सभी बसों में इमरजेंसी सायरन, अलार्म बेल एवं प्रत्येक सीट के समीप पैनिक बटन लगे होने चाहिए।
-
चालक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें।
-
वर्षाकाल में तेज बहाव वाले पुल-पुलियों को पार न करें।
-
केवल क्षमता के अनुसार विद्यार्थियों का ही परिवहन किया जाए।
-
स्कूल संचालकों द्वारा चालकों की नियमित काउंसलिंग एवं प्रशिक्षण कराया जाए।
-
GPS एवं CCTV के माध्यम से निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए।
-
बस के दरवाजों को भीतर से बंद करने की व्यवस्था अनिवार्य है।
-
पालकों एवं विद्यार्थियों से वाहन चालक संबंधी फीडबैक प्राप्त किया जाए।
-
बस चालक एवं परिचालक का यूनिफॉर्म में होना अनिवार्य है।
-
किसी भी छात्र या छात्रा को ड्राइवर के केबिन में न बैठाया जाए।
-
वर्षाकाल के दौरान परिवहन हेतु विशेष दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना अनिवार्य है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें